जलवायु न्याय (क्लाइमेट जस्टिस)

जलवायु न्याय (क्लाइमेट जस्टिस)

संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (UNFCCC) के अंतर्गत हुआ पेरिस समझौता (COP-21) विश्व का पहला दस्तावेज है जिसमें “जलवायु न्याय” शब्द को शामिल किया गया है।
                  सामान्य शब्दों में जलवायु न्याय का तात्पर्य जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन का वर्तमान एवं भविष्य की पीढ़ी पर पड़ने वाले प्रभाव को कम कर वंचित एवं पीड़ित वर्गों को न्याय पहुँचाना है।

जलवायु न्याय (क्लाइमेट जस्टिस) - ShivaGStudyPoint
                     जलवायु परिवर्तन का नया आयाम पर्यावरण शरणार्थी के रूप में उभर कर सामने आया है। भविष्य में पर्यावरण शरणार्थी सबसे बड़ी वैश्विक समस्या होगी अर्थात् देशों के मध्य रणनीतिक सम्बंधों का आधार स्तम्भ होगा। समय रहते इस समस्या से निजात पाना सतत विकास की दिशा में एक पहल होगी जो एक प्रतिबद्व राष्ट्र की पहचान होगी।
                     पिछले कुछ वर्षों में जलवायु न्याय आंदोलन को गति मिली है। परन्तु इसको पाने के लिए विकासशील राष्ट्रों के साथ-साथ विकसित राष्ट्रों को भी जिम्मेदार राष्ट्र का परिचय देना होगा।
                     इसी दिशा में भारत ने पेरिस समझौते में अपनी प्रतिबद्वता को दर्शाया है, जो इस प्रकार है :-

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