आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence)

आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) : अभिशाप या वरदान

आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस का सामान्य सा अर्थ है कि ऐसा कम्प्यूटर सिस्टम या मशीन प्रणाली जो इंसानों के द्वारा किए जाने वाले कार्यो का आसान कर दे, साथ ही सोचने, समझने तथा उसके अनुसार निर्णय लेने की क्षमता का सम्मिलित होना है।

         हम इस निम्बंध की शुरूआत एक कहानी के माध्यम से करते है जो इसके महत्व को प्रदर्शित करती हुई प्रतीत होती है –

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       “राजस्थाना के सुदूर जैसलमेर जिले के रामगढ़ ग्रामीण क्षेत्र में एक प्राथमिक चिकित्सालय है। यहाँ से लगभग 70 किमी की दूरी पर उच्चतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध है। किन्तु एक दिन रामदीन अपनी प्रसव पीड़ा से ग्रसित पत्नी सरिता को इस छोटे से अस्पताल में लाता है परन्तु वहाँ पर डॉक्टरों का अभाव था क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं के अभाव के कारण कोई भी डॉक्टर ग्रामीण अंचल में जाना पसंद नहीं करता है। कुछ समय इंतजार करने के बाद प्रसव पीड़ा में सरिता ने दम तोड़ दिया, मानों रामदीन पर पहाड़ टूट सा आया है। तभी उसी रास्ते से मरूधर के टीलों के भ्रमण पर आए जापानी व्यक्ति ने कहा कि इस महिला को रोबोटिक्स बचा सकता था जो कुशल चिकिल्सकों एवं कम्प्यूटर सिस्टम के निर्देशन में कार्य करके डॉक्टर की कमी को पूरा कर सकता था।”

              उपरोक्त प्रसंग ऑटोमेशन की आवश्यकता को महसूस कर रहा है। सर्वप्रथम हम इस ऑटोमेशन के शुरूआत की बात करें तो 1950 के दशक में जॉन मैकार्थी के प्रयासों से आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस की शुरूआत हुई। जो 1970 के दशक में पहचान को प्राप्त किया। इसी के साथ जापान ने फिफ्थ जनरेशन की शुरूआत कर सुपर कम्प्यूटर के निर्माण पर बल दिया।

            दरअसल हम दूनियां में चौथी औद्योगिक क्रांति की दहलीज पर खड़े है जिसमें ऐसी अकलमंद मशीने तैयार की जा रही है जो हर वो काम को करेगी, जो आज इंसान कर रहा है। वस्तुतः इस चौथी औद्योगिक क्रांति में कृत्रिम बुद्धिमता, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, आई.टी सेक्टर, इंटरनेट एवं इलेक्ट्रानिक प्रयोग इत्यादि शामिल है। आज पूरी दूनिया उद्योग 4.0 में निवेश कर रही है जिस कारण यदि भारत इसमें निवेश नहीं करे तो हम जैसे विकासशील देश के लिए शुभ संकेत नहीं है। कहा भी जाता है कि तकनीक के साथ रोजगार सृजक अर्थव्यवस्था होना चाहिए।

              जब-जब स्वचालन की बात होती है तो मशीन बनाम मानव के मुद्दे पर वाद-विवाद शुरू हो जाता है। कोई बेरोजगारी बढ़ने की बात का पक्ष लेते तो कोई नये रोजगार के पक्ष में अपनी राय रखते है। प्रश्न यह उठता है कि इससे बेरोजगारी बढ़ेगी, जिससे आर्थिक संवृद्धि प्रभावित होगी तो फिर इसे क्यों अपनाने पर बल दिया जा रहा है ? क्या यह मानव सभ्यता के पतन की शुरूआत है ? क्या अब मानव का कोई महत्व नहीं है ?

             उपरोक्त प्रश्नों का एक ही जवाब है कि जैसे कृषि क्षेत्र में पहले बैलों से जुताई की जाती थी, जब इसमें तकनीक प्रयोग से ट्रेक्टर एवं लोहे के हल आए तो कहा गया कि रोजगार कम होगा। ऐसा ही वाकया 1980 के दशक में जब कम्प्यूटर को अपनाया गया तो हर व्यक्ति इसका विरोध इसलिए कर रहा था कि इससे बेरोजगारी में वृद्धि होगी। किन्तु संदर्भित दृष्टिकोण का विश्लेषण करने पर हम पाते है कि आज इन क्षेत्रों में कई गुणा रोजगार में वृद्धि हुई है। बेशक कृत्रिम बुद्धिमता से नौकरी गुणवता एवं उत्पादकता में वृद्धि होगी अब हम यह कह सकते है कि रोजगार की प्रक्रति में परिवर्तन होगा जिसके लिए री-स्किलिंग पर बल देना होगा ताकि समायोजन हो सके। आज जो रोजगार पैदा होगें वे कृत्रिम बुद्धिमता का बनाना, उसे ठीक करना, डेटा विश्लेषण, मशीन लर्निन सिस्टम में सृजित होगें।

            वर्तमान में कुल कार्यों को करने में 71% मानव का तथा 29% मशीनों का योगदान है। लेकिन हाल ही में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की “द फ्यूचर ऑफ जोब्स – 2018” नामक रिपोर्ट में बताया गया कि 2022 तक मशीनों का योगदान 42% तक तथा 2025 तक कृत्रिम बुद्धिमता से कुल कार्य 52% तक हो जाएगे। साथ इसमें रोजगार कम होने की बात करने के साथ ही कहा कि 13 करोड़ नई नौकरयिँ पैदा होगी जिसके लिये 58% कर्मचारियों को नई तकनीक सीखनी होगी।

       प्रश्न यह उठता है कि कृत्रिम बुद्धिमता का लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ सकता है ? इस संदर्भ में कहा जा सकता है कि –

  • इससे अवसर की असमानता में वृद्धि होगी जो असंतोष को पैदा करेगा परिणामस्वरूप तंत्र में सहभागिता कम होगी।
  • इससे अप्रत्यक्ष करों का बोझ बढ़ जाऐगा क्योंकि इस कारण प्रत्यक्ष करों का महत्व कम होगा परिणामस्वरूप आम उपभोक्ताओं पर बोझ आऐगा।
  • इससे आर्थिक असमानता पैदा होगी जिससे संसाधनों का न्यायोचित वितरण न होने के कारण सामाजिक न्याय प्रभावित होगा।

             इसलिए कुछ अर्थशास्त्रीयों ने कहा है कि इस तकनीक के दौर में सामाजिक – आर्थिक न्याय को उपेक्षित नहीं किया जा सकता। इस कारण सरकार इस बदलते युग के अनुरूप कौशल विकास पर बल देना होगा।

कृत्रिम बुद्धिमता का इस्तेमाल किन-किन क्षेत्रों में हो सकता है ?

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           उपरोक्त क्षेत्रों में कुछ के बारे में संक्षेप विश्लेषण इस प्रकार है जो –

चिकित्सा क्षेत्र – इसमें रोबोट का इस्तेमाल करके एक्स-रे करना, बीमारी का पता लगाना, इंसानों के ऑपरेशन करना इत्यादि में महत्वपूर्ण हो सकते है। इससे डॉक्टरों की कमी से नहीं झूझना पड़ेगा जिससे हेल्थ सुविधा बेहतर होगी।

खेल क्षेत्र में – आज खेलों में फोटो खींचना, बेहतर रणनीति बनाना तथा कोच के निर्णय प्रक्रिया को और ज्यादा प्रभावी बनाने में कृत्रिम बुद्धिमता का उपयोग किया जा रहा है।

साइबर सुरक्षा क्षेत्र – इसमें एआई से धोखाधड़ी का पता लगाने, वित्तीय लेनदेन में होने वाली अनियमिता के बारे में जानकारी प्राप्त की जा रही है।

राजनीतिक क्षेत्र में – किसी भी निर्णय को प्रभावी तभी माना जाता है जब उसमें निष्पक्षता बरती गई है। निर्णय में पारदर्शिता हो इसलिए न्यूजीलैण्ड में “सेफ” नामक कृत्रिम बुद्धिमता से युक्त राजनेता का विकास किया गया।

ऑनलॉइन सॉफिग क्षेत्र में – कृत्रिम बुद्धिमता के माध्यम से कंपनियाँ यूजर्स की जानकारी रखती है ओर कस्टमर सर्विस के बारे में जानकारी प्रदान करती है।

शिक्षा क्षेत्र में – इसमें एआई के माध्यम से तथ्यात्मक एवं गुणवतात्मक विश्लेषण करके बच्चों को क्या सीखना चाहिए, क्यों तथा कैसे सीखना चाहिए, इसके बारे में जानकारी प्रदान करता एवं स्वयं भी निर्णय लेता है।

सीवर सफाई क्षेत्र में – आज सीवर की सफाई मानव द्वारा की जाती है जिसके कारण जहरीली गैंसों से उनकी मौत तक हो जाती है जैसा कि हाल ही में दिल्ली में देखने को मिला। कृत्रिम बुद्धिमता से युक्त रोबोट का इसमें इस्तेमाल किया जा सकता है।

          वस्तुतः यदि रामदीन के पत्नी सरिता जैसी असंख्य प्रसव एवं अन्य बीमारियों से ग्रसित है, उनको बचाना है तो हमें कृत्रिम बुद्धिमता की ओर बढ़ना होगा।

हाँ, इसमें कोई दोराय नहीं है कि इसके नकारात्मक प्रभाव भी है जो –

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             साथ ही वो दिन दूर नहीं जब ये हमारे आदेश का पालन भी न करें ओर अपने मन मुताबिक ही काम करें, ऐसे में मनुष्य समाज को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा साथ ही मानव सभ्यता खतरे में पड़ सकती है।

               बेशक आज की दूनियां कृत्रिम बुद्धिमता को अपने अर्थव्यवस्था के केन्द्र के रूप में देख रहे है। इसके साथ ही रोबोट को मान्यता देना का प्रचलन तेजी से बढ़ा है जैसे सऊदी अरब ने सोफिया को नागरिकता प्रदान की। ऐसे में हम इससे अपने पीछे नहीं खींच सकते है। आज विश्व की बड़ी – बड़ी कंपनियाँ इस क्षेत्र में निवेश कर रही है। नीति आयोग ने अपने परिपत्र में कहा कि हम भी उद्योग 4.0 में निवेश कर इस क्षेत्र में  प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगें जिसके लिए नीति आयोग ने “सबके लिए एआई” नामक पत्र का प्रकाशन किया। हाँ कमियों को ध्यान में रखते हुए इसमें भी नैतिकता जैसे मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करने की जरूरत है। साथ ही इसको मानव के नियंत्रण में रखना ही ज्यादा कारगर होगा।

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