ब्रिटिश शासन Part – 4

प्लासी का युद्ध – 1753

सम्बंधित प्रश्न –

  • Que 18. प्लासी का युद्ध एक युद्ध नहीं बल्कि समझौते का एक परिणाम था। इस मत से आप कहाँ तक सहमत है ?
  • Que 19. प्लासी का युद्ध ब्रिटिश रणनीति एवं कुटनीति की जीत थी। स्पष्ट कीजिए।
  • Que 20. प्लासी का युद्ध भारत इतिहास को निर्णायक मोड़ देने में सफल हुआ। स्पष्ट कीजिए।
  • Que 21. बक्सर के युद्ध के लिए प्लासी का युद्ध एक अभ्यास मात्र था। जिसका परिणाम पहले से ही पता था। चर्चा कीजिए।
  • Que 22. यदि प्लासी का युद्ध नहीं तो बक्सर का युद्ध नहीं होता। इस कथन से आप कहाँ तक सहमत है।
  • Que 23. बक्सर के युद्ध द्वारा ब्रिटिश शक्ति सम्पूर्ण उत्तर भारतीय शक्ति बन गयी। इस मत से आप कहाँ तक सहमत है।
  • Que 24. बक्सर का युद्ध अंग्रेजो ने बक्सर में ही क्यों लड़ा ?

इस युद्ध से पहले बंगाल की स्थिति –

  1. बंगाल मुगल साम्राज्य का एक महत्वपूर्ण प्रांत था। जिसे मुर्शीद कुली खाँ ने पहली बार स्वतंत्र करने का सोचा और इस मुगल सत्ता से पृथक कर दिया। चुंकि वह मुगल सत्ता का दीवान था एवं आगे चलकर ई. में वहाँ का नवाब सुबेदार भी बनाया गया। इस प्रकार पहली बार एक ही व्यक्ति के पास दीवानी एवं निजामत (फौजदारी) का अधिकार प्राप्त हुआ। आगे चलकर उड़ीसा को बंगाल का भाग बना दिया जिससे बंगाल का विस्तार हुआ। आगे बिहार को भी शामिल कर दिया।
  2. बंगाल में जमींदारी प्रथा (प्रणाली) की स्थिति मजबूत थी अर्थात् प्रशासन में जमींदारों का महत्वपूर्ण योगदान था। अर्थात् बंगाल में जमींदार एवं शासक के मध्य महत्वपूर्ण सम्बंध थे जो चलकर असंतुलित हो जाता है। (अली वर्दी खाँ के बाद)
  3. इस खराब सम्बंध उत्पन्न होने के कारण बंगाल में कई आंतरिक चुनौतियाँ उत्पन्न हो गयी जैसे –

A. दरबारी षड्यत्र एवं गुटबाजी।

B. कुछ महत्वपूर्ण व्यापारिक घरानों के पास महत्वपूर्ण वित्तीय सम्पन्नता। (सुदखोर)

C. नवाब को राज्य के बड़े जमींदारों का सहयोग नहीं मिल पा रहा था।

D. जमींदारों के द्वारा कृषकों से उच्च दर पर लगान वसूला जा रहा था लेकिन राजकोष खाली दिख रहा था।

बंगाल में कंपनी की स्थिति –

  1. ईस्ट इंडिया कंपनी आरंभ में बंगाल में एक व्यापारिक कंपनी बनकर आई। लेकिन सहजादा सूजा (1651) के फरमान ने बंगाल में उसकी स्थिति मजबूत कर दी क्योंकि 3,000/- रूपये वार्षिकी के बदले चुंगी मुक्त व्यापार (बंगाल) की छूट दे दी।
  2. आगे चलकर ऐसा ही एक फरमान फर्रूखसियत (1717) ने जारी किया। जिसके द्वारा कंपनी की स्थिति काफी मजबूत हो गई। हमेशा के लिए नवाब एवं कंपनी के बीच विवाद को उत्पन्न कर दिया। फरमान के मुख्य बिन्दु –

a. 3,000/- वार्षिक के बदले बंगाल में कंपनी को चूंगी मुक्त व्यापार की छूट।

b. शाही-टकसाल में निःशुल्क सिक्के ढालने की छूट।

c. 10,000/- वार्षिक के बदले सूरत में चुंगी मुक्त व्यापार की छूट।

d. हैदराबार में चुंगी मुक्त व्यापार।

e. कलकत्ता के आस-पास 38 गाँव को किराये पर लेने की अनुमति दी (आगे चलकर इसी में फोर्ट विलियम की स्थापना)

प्लासी युद्ध का कारण –

युद्ध की पृष्ठभूमि – 1717 के फरमान में बंगाल के नवाब एवं कंपनी के बीच टकराव को जन्म दिया क्योंकि –

A. इस फरमान को कंपनी महाधिकार पत्र (मैग्नाकार्टा) समझती थी, अर्थात् कंपनी इस अधिकार पत्र द्वारा अपने व्यापारिक अधिकार के साथ-साथ राजनैतिक अधिकार को भी प्रारम्भिक रूप में मान्यता दे रही थी जबकि बंगाल के नवाब के लिए यह एक अस्थायी दस्तावेज था। (स्थायी अस्थायी)

B. कंपनी के अधिकारी यह मानते थे कि फरमान में दिए गए छूट सारे व्यापार के लिए है जबकि बंगाल के नवाब का मानना था कि यह सिर्फ कंपनी के व्यापार के लिए है। (सभी व्यापार केवल कंपनी का व्यापार)

C. कलकत्ता के आस-पास कंपनी ने भूमि किराये पर ली और नवाब को यह पसंद नहीं था।

D. कंपनी का मानना था कि वह बिना शुल्क दिए शाही टकसाल का इस्तेमाल कर सकती थी क्योंकि मुगल बादशाह के द्वारा यह अधिकार दिया गया।

E. इस तरह बंगाल के नवाब एवं कंपनी के बीच कई मुद्दों पर विवाद उभरे जिसमें अन्य महत्वपूर्ण विवाद जमींदारी प्रथा थी अर्थात् कंपनी अपने जमींदारी अधिकार को सम्प्रभु अधिकार मानती थी जबकि नवाब इसे लगान वसूलने वाला एक एजेंट का अधिकार मानता था।

यद्यपि बंगाल के नवाब एवं कंपनी के बीच 1717 के पश्चात् लगातार विवाद उठते रहे और एक-दूसरे पर वे आरोप लगाते रहे थे फिर भी दोनों प्रत्यक्ष रूप से बचते रहे थे क्योंकि दोनों को एक-दूसरे से लाभ हो रहा था। दोनों का जरूरत थी लेकिन 1740 के बाद से लेकर 1756 के बीच तनाव के यह बिन्दु काफी मजबूत हो गये और प्रत्यक्ष संघर्ष की नौबत आ गई।

प्लासी के युद्ध का कारण –

  • कंपनी का व्यापार भारत में लगातार बढ़ रहा था। इस व्यापार की रक्षा अनिवार्य थी जिसका कारण प्लासी का युद्ध था। कंपनी का भारतीय व्यापार उत्तरोत्तर बढ़ रहा था और 1740 ई. तक कुल व्यापार की मात्रा काफी हो चुकी थी जिससे कंपनी का व्यापारिक हित काफी महत्वपूर्ण हो चुका था। इसे बचाने के लिए कंपनी ने विभिन्न प्रकार के भारतीय क्षेत्र, दुर्ग, किला तथा नगरों में अपने अधिकारों को सुनिश्चित किया।
  • डच एवं फ्रांसीसी कंपनी भारतीय व्यापारियों के साथ मिलकर कंपनी के व्यापारिक हित का नुकसान कर रही थी। परिणामतः 1753 से 1756 के बीच कंपनी के कुल व्यापार में काफी गिरावट आई। 40 से घटकर 26.8 हो गई। इससे कंपनी के व्यापारिक नुकसान का अनुमान लगाया जा सकता है। ऐसे में कंपनी अपने व्यापारिक लाभ के लिए एक तरफ प्रतिस्पर्धी यूरोपीय कंपनी, दूसरी ओर बंगाल के साथ युद्ध करने की सोचा। इसी का परिणाम प्लासी बना।
  • ब्रिटिश संसद और कंपनी के बीच अच्छे सम्बंध ने भी प्लासी को उत्पन्न किया क्योंकि इसी दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री वॉलपोल का कहना है कि कंपनी का हित इग्लैंउ का हित है तथा कंपनी का दुश्मन इग्लैंड का दुश्मन है।

Que 25. ब्रिटिश प्रधानमंत्री वॉलपोल के इस कथन कि कंपनी का हित, इग्लैंड का हित है तथा कंपनी का दुश्मन, इग्लैंड का दुश्मन है। के प्रकाश में इस बात को रेखांकित कीजिए कि प्लासी के युद्ध के लिए जितना महत्वपूर्ण आंतरिक कारण था उतना ही बाह्य कारण। टिप्पणी कीजिए।

निष्कर्ष – प्लासी युद्ध में यद्यपि कई कारण मौजूद थे लेकिन वास्तविकता यह है कि यह युद्ध था ही नहीं बल्कि षडयंत्र का परिणाम था।

  • बंगाल की आंतरिक स्थिति ने भी कंपनी को युद्ध के लिए प्रोत्साहित किया। बंगाल लगातार रघुजी भौंसले के हमले से प्रभावित रहा है, दरबारी गुटबाजी भी काफी हावी थी जिससे दरबार में विभिन्न प्राकर के हित समूहों का निर्माण हुआ है। इसने भी प्लासी युद्ध उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • दक्कन के हालात ने भी कंपनी का प्रभावित किया, दरअसल फ्रांसिसीयों को दक्षिण में काफी बड़ी सफलता मिल रही थी। अतः बंगाल में वह अपनी स्थिति से चितिंत थे। इस चिंता को दूर करने का एक बेहतर साधन था प्रत्यक्ष संघर्ष।

Que 26. जिस युद्ध का कारण हम भारतीय पृष्ठभूमि में खोजते है वह कहीं न कहीं यूरोप में मौजूद था। इस मत से आप कहाँ तक सहमत है।

निष्कर्ष – यदि इसमें से किसी एक कारण को माना जाए तो क्या होगा – 1. इतिहास कहानी बनकर रह जायेगा तथा इतिहास की समग्र व्याख्या न हो पायेगी। 2. युद्ध के लिए अन्तर्राष्ट्रीय कारकों की पहचान न हो सकती थी, खासकर इस युद्ध में क्लाइव की कुटनीति का सर्वाधिक महत्वपूर्ण योगदान है जिसे बाहरी कारक ने ही उत्पन्न किया था।

प्लासी युद्ध के द्वितीयक कारण/परिस्थितियाँ तात्कालिक कारण –

  1. बंगाल नवाब के बिना अनुमति में  कंपनी ने कलकता नामक शहर की किलेबंदी कराई।।
  2. बंगाल में उत्तराधिकार के  मामले में भी युद्ध की परिस्थिति उत्पन्न की क्योंकि इसने दरबार में कई गुट बना दिए।\
  3. ब्लैक हॉल की घटना।

परिणाम एवं महत्व :-

  1. 25 जून को मुर्शिदाबाद में मीर जाफर को बंगाल का नया नवाब घोषित किया गया।
  • नवाब बनने के पश्चात् कंपनी को निम्न उपहार दिए –
  • कंपनी को 24 परगना की जमींदारी दी।
  • क्लाइव को 2.34 पौण्ड (23 लाख) दिए।
  • 50 लाख रूपये कंपनी के अन्य अधिकारी व सैनिकों को दिये गये।
  • सिराजुदौला द्वारा कलकत्ता पर कब्जे के दौरान कंपनी को जो नुकसान हुआ उसका हर्जाना दिया गया।
  • बंगाल में फ्रांसीसियों के सारे युद्ध के अड्डे अंग्रेजों को सौंप दिए।
  • एक समझौता यह हुआ कि कंपनी के निजी व्यापारी अब मुक्त व्यापार कर सकेंगे।
  • 1 पौण्ड 10 पेन्स 10 लाख

सैन्य महत्व :-

  • प्लासी युद्ध का कोई खास सैन्य महत्व नहीं था। वास्तव में यह युद्ध था ही नहीं, यह तो एक छोटी-मोटी लड़ाई थी, जिसकी पुष्टि इस बात में भी होती है कि कंपनी का 65 एवं नवाब का 500 व्यक्ति मारे गए। नवाब के महत्वपूर्ण सेनापति ने युद्ध में हिस्सा नहीं लिया जैसे – रायदुर्लभ, मीर जाफर।
  • अंग्रेजी सेना ने कोई सैनिक श्रेष्ठता स्थापित नहीं की बल्कि उन्होंने कुटनीति एवं षड्यंत्र के द्वारा इस युद्ध का परिणाम अपने पक्ष में किया। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि प्लासी के युद्ध में यदि किसी भी चीज का महत्व था तो वह अंग्रेजी कुटनीतिक श्रेष्ठता थी।
  • Que 27. प्लासी युद्ध का सबसे बड़ा महत्व अंग्रेजों की कुटनीतिक श्रेष्ठता थी। स्पष्ट कीजिए।
  • Que 28. प्लासी युद्ध में सबसे बड़ी जीत क्लाइव की हुई उसके बाद ब्रिटिश सत्ता की। इस मत से आप कहा तक सहमत है।

वास्तविक महत्व – युद्ध के बाद के नतीजों में था। इसने बंगाल के ऊपर अंग्रेजी जुआ रखा जिसे बंगाल कभी भी उतार नहीं सका। यह ध्यान देने योग्य बात है कि युद्ध के बाद कंपनी ने एक रेजडेन्ट तथा 6000 सैनिक की टुकड़ी नवाब के दरबार में नियुक्त किया जिससे नवाब अंग्रेजों के हाथों की कठपूतली बन गए।

इस युद्ध ने कंपनी को बहुत बड़ा संसाधन प्रदान किया जिसके दम पर वह स्थानीय एवं बाहरी दोनों प्रतिद्धन्द्धियों को खत्म कर दिया तथा भारत पर सम्पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने के लिए उपयोगी बना।

इस युद्ध ने बंगालल के शासन के आंतरिक खोखलेपन को उजागर किया। जबकि बंगाल सबसे मजबूत प्रांत माना जाता था। बंगाल की इस स्थिति ने कंपनी को मनोवैज्ञानिक लाभ पहुँचाया।

बक्सर का युद्ध

प्लासी युद्ध के बाद मीर जाफर की स्थिति – मीर जाफर पूरी तरह कंपनी की गिरफ्त में आ चुका था और उस पर आश्रित हो चुका था। कंपनी के अधिकारी मीर जाफर के सामने प्रतिदिन नयी-नयी मांगों को रख रहे थे। मीर जाफर की स्थिति दयनीय होती जा रही थी और वह इससे निकलना चाह रहा था।

कंपनी की स्थिति – कंपनी काफी असंतुष्ट है क्योंकि मीर जाफर कंपनी के लिए बिल्कुल बेकार हो चुका था तथा बहुत सारी रकम मीर जाफर पर बकाया हो चुकी थी ऐसे में उसने नये विकल्प तलाशने शुरू कर दिये।

मीर कासिम एवं कंपनी के मध्य संधि – 27 सितम्बर, 1760 को दोनों के बीच महत्वपूर्ण संधि हुई, इसमें निम्न बाते तय की गई –

  1. मीर कासिम ने कंपनी को वर्द्धमान, चटगाँव तथा मिदनापुर का क्षेत्र दिया।
  2. दक्कन में कंपनी के युद्ध प्रयासों की सहायता के लिए 5 लाख रूपये देगा।
  3. सिलहट (असम) के चुना व्यापार से होने वाली आमदनी का आधा भाग कंपनी को देगा।
  4. इसके अलावा दोनों के बीच यह संधि हुई कि आपका शत्रु, हमारा शत्रु, आपका मित्र हमारा मित्र है।

नवाब के रूप में मीर कासिम –

  1. नवाब बनने के पश्चात मीर कासिम ने कंपनी के अधिकारियों को पुरस्कार दिया।
  2. 27 सितम्बर, 1760 की संधि को पूर्णतः मान्यता दी गई।

नवाब बनने के बाद उसने अपने आप को सम्प्रभु घोषित किया और निम्नलिखित कदम उठाये –

1. राजधानी मुर्शिदाबाद का स्थानान्तरण मुंगेर किया क्योंकि –

A. वह बिहार के इस क्षेत्रों से भलीभांति परिचित तथा उसे यह सामरिक दृष्टिकोण से सुरक्षित लगता था।

B. वह अपने आप को एक महान शासक घोषित करना चाहता था इसके लिए उसका सम्प्रभु होना आवश्यक था। यह सम्प्रभुता तभी प्राप्त हो सकती थी, जब उसकी राजधानी सुरक्षित हो।

C. क्योंकि मुंगेर में राजधानी बनाकर वह सहायक संधि के प्रत्यक्ष प्रभावों से दूर रह सकता था।

D. मुंगेर में राजधानी परिवर्तन के बाद वह अपने राजकोष में वृद्धि करना चाहता था खासतौर पर बिहार के राजस्व का।

E. क्योंकि मुंगेर भौगोलिक दृष्टिकोण से काफी सुरक्षित था और मुर्शिदाबाद से नजदीक पड़ता था। यहाँ पर श्रम आधिक्य इस प्रकृति का था कि वह नवाब के प्रति विश्वासी बना रहे न कि कंपनी के प्रति।

2. अपनी सेना को आधुनिक बनाता है और उसके प्रशिक्षण की व्यवस्था मुंगेर में करता है।

3. मुंगेर में गोले-बारूद का कारखाना खोलता है।

4. उपद्रवी जमींदारों के प्रति सशक्त कदम उठाता है। बेईमान अधिकारी को दंडित करता है और कुछ को मृत्यु दंड देता है जैसे रामनारायण

बक्सर का युद्ध व कारण – कंपनी और मीर कासिम के बीच उपरोक्त कदम उठाने के कारण टकराव की स्थिति बनने लगी और इसके तात्कालिक कारण के रूप में दस्तक के गलत इस्तेमाल का लिया गया लेकिन ऊपर उठाये गए कदम ही इस युद्ध के लिए जिम्मेदार बने। अर्थात् नवाब सम्प्रभु बनना चाह रहा था और कंपनी उसे बनने नहीं दे रही थी। हांलाकि आरम्भिक स्तर पर युद्ध को टालने का प्रयास किया गया लेकिन ऐसे समय में कंपनी के एजेण्ट एलिस ने पटना शहर पर आक्रमण कर दिया और कंपनी ने मीर कासिम को नवाब के पद से बर्खास्त कर दिया इस हालात में नवाब ने मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय और अवध के नवाब शुजाउद्धौला के साथ संधि की। तीनों की सम्मिलित सेना एवं कंपनी की सेना के बीच युद्ध हुआ (22 Oct. 1764) (बक्सर नामक जगह पर) जिसे इतिहास में बक्सर युद्ध के नाम से जाना जाता है। इस युद्ध में अंग्रेजों का सेनापति हेक्टर मुनरो था।

बक्सर युद्ध के पश्चात् – फरवरी, 1765 में मीर जाफर के पुत्र नजबउदौला को नया नवाब घोषित किया लेकिन शर्त यह रखा गया कि बंगाल का वास्तविक प्रशासन नायाब सुबेदार के हाथ में होगा जिसकी नियुक्ति नवाब करेगा तथा अनुशंसा कंपनी करेगी। बिना कंपनी कि अनुमति से उसे कभी भी नहीं हटाया जा सकता।

इसके कुछ दिन पश्चात् क्लाइव गर्वनर बनकर भारत आया, उसने अवध के नवाब व मुगल शासक के साथ संधियाँ की जिसे इलाहाबाद की संधि कहा जाता है।

इलाहाबाद की संधि (अवध के नवाब के साथ) –

  • अवध के नवाब से कड़ा एवं इलाहाबाद का क्षेत्र कंपनी ने ले लिया।
  • 50 लाख रूपया युद्ध हर्जाने के रूप में अवध से लिया गया।
  • कंपनी का शत्रु अवध का शत्रु और कंपनी का मित्र अवध का मित्र होगा।

इस उपरोक्त संधि के साथ कंपनी ने अपना विस्तार अवध तक कर दिया।

इलाहाबाद संधि (मुगल बादशाह के साथ) –

  • कड़ा एवं इलाहाबाद का क्षेत्र कंपनी ने मुगल बादशाह को दे दिया और यह तय हुआ कि मुगल बादशाह कंपनी की सुरक्षा में इलाहाबाद में रहेगे।
  • बदले में मुगल बादशाह ने कंपनी को बगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी दे दी।
  • यह तय हुआ कि कंपनी बंगाल व बिहार  के राजस्व से 26 लाख रूपये बादशाह को देगा और 58 लाख रूपये बंगाल के निजामत को देगा।
  • Que 29. बक्सर के युद्ध से कई ज्यादा महत्वपूर्ण उसके बाद की संधियाँ थी। स्पष्ट कीजिए।
  • Que 30. बक्सर युद्ध के कारण से कई ज्यादा महत्वपूर्ण उसके परिणाम थे। स्पष्ट कीजिए।

इस तरह बक्सर युद्ध के पश्चात् कंपनी ने बंगाल में द्धैध शासन की स्थापना कर दी। निजामत नवाब के हाथों में जबकि दीवानी कंपनी के हाथों में जबकि वास्तविकता यह है कि कंपनी परोक्ष रूप से दीवानी और निजामत दोनों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया और नायब सुबेदार के माध्यम से उसने नवाब पर नियंत्रण स्थापित किया जबकि नायब दीवान के माध्यम से दीवानी को अपने हाथों में ले लिया और इसके लिए दो एजेन्टों की नियुक्ति की -1. मोहम्मद रजा खाँ 2. सिहाब राय

इस तरह बंगाल में एक ऐसी व्यवस्था स्थापित हुई कि नवाब के पास उत्तरदायित्व था किन्तु किसी भी प्रकार का शक्ति और संसाधन नहीं था। वहीं दूसरी ओर कंपनी के पास सारी शक्ति और संसाधन थी लेकिन उत्तरदायित्व नहीं। इसी काल को बंगाल के लूट-कसौट का काल कहा जाता है।

आगे चलकर कई कारणों से कंपनी ने हुकूमत को अपने हाथों में नहीं लिया जबकि कंपनी के कई बड़े अधिकारी चाहते थे। कंपनी ने ऐसा क्यों नहीं किया –

  1. कंपनी के पास पर्याप्त विश्वसनीय अधिकारियों की कमी थी।
  2. यदि कंपनी क्षेत्रों पर प्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित करती तो उसे व्यापारिक लाभ कम मिलता और व्यापारिक लाभ कम होने के कारण कंपनी और उसके निर्देशक मंडल के बीच सम्बन्ध खराब हो जाता और यह मंडल ब्रिटिश संसद के प्रति उत्तरदायी है ऐसे में कंपनी के ऊपर ब्रिटिश संसद का हस्तक्षेप काफी बढ़ जाता।
  3. प्रत्यक्ष नियंत्रण के बाद हो सकता था कि अन्य भारतीय शासक एकजूट हो जात, अन्य यूरोपिय कंपनियाँ इसका साथ देती और आम लोगों के द्वारा विद्रोह को आगे बढ़ाया जाता था ऐसे में कंपनी के अल्पकालीन व दीर्घकालीन लाभ खत्म हो सकते थे। साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय ब्रिटिश कुटनीति का पर्दाफाश हो जाता।

बक्सर युद्ध का महत्व –

  1. यह वास्तव में एक युद्ध था जिसमें दोनों पक्षों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया लेकिन अन्ततः मध्यकालीन भारतीय सेना पर आधुनिक अंग्रेजी सेना की जीत हुई और अंग्रेजों ने अपनी श्रेष्ठता स्थापित कर दी।
  2. देखा जाय तो बक्सर के युद्ध ने प्लासी की संस्तुति कर दी। अर्थात् प्लासी में जो कुछ अस्पष्ट और अनिर्णित तथा संदिग्ध रह गया था वह सब बक्सर में सामने आ गया।
  3. इस युद्ध के पश्चात् उत्तरी भारत में अंग्रेजी प्रभुत्व की स्थापना हुई। बंगाल का नवाब उसके हाथों की कठपुतली बन गया, अवध का नवाब अधीनस्थ बन गया जबकि मुगल बादशाह पेंशनयोगी बन गया। इस प्रकार बक्सर के युद्ध ने अंग्रेजों के लिए दिल्ली का रास्ता खोज लिया। इस प्रकार वह उत्तर भारत की सबसे बड़ी शक्ति बन गया।
  4. उत्तर भारत की राजनैतिक शुन्यता को बक्सर के युद्ध ने भर दिया। तथा यदि सम्पूर्ण भारत की बात की जाय तो बक्सर युद्ध के बाद कंपनी के रूप में तीसरा बड़ा दावेदार उत्पन्न हुआ। (अफगान व मराठा के बाद)
  • Que 31. बक्सर के युद्ध ने उस जुआ को उतार दिया जिसने बंगाल को जकड़ रखा था। अब बंगाल जुए की जगह जंजीर ने लिपटा हुआ था। स्पष्ट कीजिए।
  • Que 32. भारतीय इतिहास के दो महान युद्ध बक्सर नामक जगह पर लड़ा गया इसके पीछे युक्तिसंगत कारण क्या हो सकते है। रेखांकित कीजिए।

1. बक्सर का युद्ध

2. बक्सर को क्यों चुना ?

A. बक्सर एक समतलीय मैदानी क्षेत्र है जहाँ पर युद्ध के लिए आवश्यक दशाएँ मौजूद होती है।

B. जैसे – बंकर बनाना, सैनिकों को विभिन्न पंक्तियों में खड़ा करना।

C. बक्सर गंगा के किनारे अवस्थित है। यहाँ पर सैनिकों के लिए तमाम प्रकार के संसाधन उपलब्ध कराने आसान।

D. बक्सर में एक ही साथ अवध, बंगाल और मुगल बादशाह के साथ निपटा जा सकता था और खासकर कलकत्ता बंगाल प्रेसीडेंसी से यह अन्य की तुलना नजदीक हो सकता था।

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