सीबीआई (CBI) & केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CVC)

सीबीआई (CBI) & केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CVC)

-: सीबीआई (CBI) :-

चर्चा में क्यों :-

  • हाल ही में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी केन्द्रीय जांच ब्यूरो की साख और प्रतिष्ठा पर एक बार फिर से प्रश्न खड़ा हो गया।
  • दरअसल सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना दोनों ने एक-दूसरे पर रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगाए है।
  • यह मामला कोर्ट और सरकार तक पहुँचा, सरकार ने तत्काल प्रभाव से दोनों अफसरों को छुट्टी पर भेज दिया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई अधिकारियों के रिश्वत के आरोपों की जांच के लिए केन्द्रीय सर्तकर्ता आयोग को समय दिया।
  • एम. नागेश्वर राव को सीबीआई का निदेशक पद दिया गया है।
  • दूसरी तरफ आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कि की जिस प्रक्रिया से उसे पद से हटाया गया वह गलत है।

विवाद का कारण :-

  • Oct. 2017 में जब सीबीआई डायरेक्टर ने CVC के नेतृत्व वाले पांच सदस्यीय पैनल की बैठक में अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर प्रमोट किए जाने पर आपत्ति जताई।
  • CVC ने सीबीआई में प्रमोशन को लेकर चर्चा करने के लिए मीटिंग बुलाई जिसमें अस्थाना को एजेंसी में नबर 2 की हैसियत से बुलाया गया क्योंकि वर्मा उस समय विदेश में थे। इस पर वर्मा ने कहा कि उसने अस्थाना को अधिकृत नहीं किया है।
  • अस्थाना ने आरोप लगाया कि हैदराबाद के व्यापारी सतीश बाबू सना के लिए आलोक वर्मा को 2 करोड़ की घूस दी।
  • वर्मा ने अस्थाना द्वारा जांच किए जा रहे महत्त्वपूर्ण मामले वापस लेकर के शर्मा को सौंप दिया। जैसे – दिल्ली सरकार के मामले, पी. चिदंबरम एवं अन्य के खिलाफ जांच शामिल थी।
  • व्यापारी सतीश बाबू सना को जब ने पकड़ा तो उसके सामने अस्थाना को 3 करोड़ रूपये देने का दावा किया।

प्रभाव कहाँ क्या होगा :-

  • सीबीआई की विश्वसनीयता एवं कार्यशैली प्रभावित होगी।
  • इस प्रकार का विवाद भारत सरकार की असफलता को दर्शाता है।
  • सीबीआई के फैसलों में राजनीतिकरण की सुगबुहाट के आरोप लगने शुरू हो गये।
  • शीर्ष जांच एजेंसी में भ्रष्टाचार के आरोप तंत्र में उत्पन्न खामियों को उजागर कर रहे है।
  • संवैधानिक संस्थाओं एवं शीर्ष जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर प्रश्न चिह्न लगा, साथ ही साथ इन शीर्ष संस्थाओं के प्रति आमजन की आस्था एवं विश्वास में कमी को लायेगा।

वर्तमान स्थिति :-

  • आलोक वर्मा के खिलाफ चल रही जांच CVC करेगी। ये जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस A.K. पटनायक की निगरानी में हो रही है। दरअसल CVC की रिपोर्ट में वर्मा को क्लीन चिट नहीं मिली।
  • सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा द्वारा दायर याचिका को भी खारिज करते हुए कहा कि सरकार द्वारा किया गया फैसला, सीबीआई की विश्वसनीयता एवं साख बचाने की दिशा में जरूरी था। साथ ही माननीय सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान सीबीआई निदेशक एम. नागेश्वर राव को विशेष स्थितियों में ही फैसले लेने की छुट दी।
  • अब सीबीआई विवाद का समाधान सुप्रीम कोर्ट के आने वाले निर्णयों में होगा जो उसकी विश्वसनीयता, कार्यशैली, साख को मजबूत करने के साथ ही उसके सामने खड़ी चुनौतियों को कम करने का प्रयास होगा।

सुझाव :-

  • अधिकारियों द्वारा लगाये गए आरोपों की अब शीघ्रता से जांच की जानी चाहिए।
  • जांच के निष्कर्ष के अनुसार निर्णय लिया जाए ताकि विश्वसनीयता को बरकरार रखा जा सके।
  • सीबीआई के उपर समय – समय पर आरोप लगते आये है। इनको ध्यान में रखते हुए उसके पर्याप्त कौशल की कमी को पूर्ण किया जाये।
  • भ्रष्टाचार से लड़ने की सीबीआई की वर्तमान स्थिति में सुधार की आवश्यकता है।
  • सीबीआई द्वारा आपराधिक विवादों को सुलझाने की दर में तुलनात्मक रूप से वृद्वि करने की जरूरत है। जैसे – ग्रह मंत्रालय ने कहा कि 2014 में 69.02%, 2015 में 65% तथा 2016 में 66.80% मामलों को ही सुलझाया गया था।

CBI का गठन – 1941 में दिल्ली विशेष पुलिस संस्थापन अधिनियम से।

सीबीआई (CBI) & केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CVC) - ShivaGStudyPoint
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मुख्यालय – नई दिल्ली

  • यह कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अधीन कार्य करती है।
  • भारत के लिये सीबीआई ही इन्टरपोल की आधिकारिक इकाई है।
  • 1 अप्रैल, 1963 में ग्रह मंत्रालय के संकल्प के द्वारा दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान को लोकप्रिय नाम “केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो” मिला।
  • सीबीआई को अपराध का अन्वेषण करने हेतु कानूनी शक्तियां डीएसपीई एक्ट, 1946 से प्राप्त है।
  • केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के संस्थापक निदेशक डी. सी. कोहली थे।

कार्य :-

  • CBI राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के घोटालों, धोखाधड़ी, हत्या, संस्थागत घोटालों जैसे मामलों की देश व विदेश में जांच करती है।
  • भारत सरकार, राज्य सरकार की सहमति से राज्य के मामलों की जांच करने का आदेश CBI को देती है।
  • सर्वोच्च न्यायालय या हाईकोर्ट बिना राज्य की सहमति से भी CBI को जांच का आदेश दे सकता है।
  • हत्या, अपहरण, आतंकवादी अपराध तथा आर्थिक अपराध जैसे परम्परागत स्वरूप के महत्वपूर्ण अपराधों की भी जांच का कार्य करती है।

अपराध अन्वेषण :-

  • भ्रष्टाचार निरोधक प्रभाग  – 1988 भ्रष्टाचार निरोधक Act. के तहत गठन
  • आर्थिक अपराध प्रभाग
  • विशेष अपराध प्रभाग – SC & HC के आदेश पर
  • सीबीआई द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक Act. 1988 के अन्तर्गत आने वाले अपराधों का अन्वेषण करने पर उसकी निगरानी का कार्य केन्द्रीय सतर्कता (CVC) आयोग करती है तथा अन्य मामलों की निगरानी भारत सरकार के कार्मिक, पेंशन तथा शिकायत मंत्रालय के अन्तर्गत कार्यरत कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) करती है।

सीबीआई निदेशक की नियुक्ति – एक उच्चस्तरीय समिति करती है। इस समिति के सदस्य-

  1. प्रधानमंत्री
  2. भारत के मुख्य नयायाधीश
  3. लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष

        समिति रिपोर्ट/ सिफारिश सरकार को भेजती है जिसके बाद CBI निदेशक की नियुक्ति होती है।

  • कार्यभार संभालने की तारीख से कम से कम दो साल तक निदेशक पद से कोई नहीं हटा सकता है।

सीबीआई निदेशक को हटाने की प्रक्रिया –  CBI निदेशक को हटाने के लिए “कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग” को उच्च स्तरीय समिति के पास मामले को ले जाना पड़ता है। इसमें निदेशक पर लगे आरोपों की जांच होती है। तीन सदस्यीय समिति ही यह निर्णय लेती है कि निदेशक को हटाना है या नहीं।

                  वस्तुतः कैबिनेट की चयन समिति और सरकार के पास भी इस बारे में कोई अधिकार नहीं होता है।

-: केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CVC) :-

  • भारत सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों कर्मचारियों से सम्बधित भ्रष्टाचार नियंत्रण की सर्वोच्च संस्था है।
  • इसकी स्थापना सन् 1964 में की गई थी।
  • इसका गठन संथानम समिति की सिफारिश पर किया गया।
  • केन्द्रीय सतर्कता आयोग सांविधिक दर्जा प्राप्त एक बहुसदस्यीय संस्था है।
  • आयोग में एक अध्यक्ष एवं दो सतर्कता आयुक्त होते है जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक तीन सदस्यीय समिति, (प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता-प्रतिपक्ष तथा केन्द्रीय ग्रहमंत्री सदस्य), की सिफारिश पर करता है।
  • कार्यकाल – 4 वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु तक जो भी पहले हो।
  • केन्द्रीय सतर्कता आयोग के वेतन, भत्ते एवं अन्य सेवा शर्ते संघ लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष के समान ही होती है।

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