सिविल सेवा के लिए अभिरूचि तथा बुनियादी मूल्य

सिविल सेवा के लिए अभिरूचि तथा बुनियादी मूल्य

(Interest and Basic Values ​for Civil Service)

“खुद को खोजने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप दूसरों की सेवा में खुद को खो दे” – महात्मा गांधी।

सिविल सेवा के लिए अभिरूचि तथा बुनियादी मूल्य –

अभिरूचि :- इसका तात्पर्य है कि कुछ करने की स्वाभाविक क्षमता या स्वाभाविक प्रवृत्ति है। अभिरूचि ऐसे अभिलक्षणों का समूह है जो किसी विशेष क्षेत्र में प्रवीणता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति की क्षमता के सूचक माने जाते है।

अभिरूचि –

  • अभिरूचि न तो पूर्णतः जन्मजात होती है और न ही पूर्णतः अर्जित।
  • अभिरूचि का स्तर सभी व्यक्तियों में एक समान नहीं होता है।
  • इसका भविष्यवादी संदर्भ होता है।
  • अभिरूचि पहले से विद्यमान होती है किन्तु इसे पोषित किया जाता है।
  • अभिरूचि कौशल नहीं है। कौशल अर्जित किया जाता है।

सिविल सेवकों के लिए तीन प्रकार की अभिरूचि –

  • बौद्धिक अभिरूचि – संबधित सिविल सेवक तर्क संगत ढंग से विचार करे। उद्धेश्यपूर्ण रूप से कार्यवाही करे। अपने आस-पास के परिवेश के साथ प्रभावी ढ़ंग से व्यवहार करे।
  • भावनात्मक अभिरूचि – अपने सहकर्मियों, अधीनस्थों और जनता के साथ सिविल सेवकों के प्रभावी आचरण को सुनिश्चित करती है।
  • नैतिक अभिरूचि – इसमें न्याय, करूणा सहानुभूति आदि मूल्यों का सम्मिलित किया जाता है।

                उपरोक्त अभिरूचियाँ सिविल सेवक को पेशेवर मूल्यों की प्राप्ति में सक्षम बनाती है। यह ये सुनिश्चित करती है कि सिविल सेवक अपने कर्तव्यों का निष्पादन न केवल कुशलता से अपितु जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रभावी ढंग से भी करें।

अभिरूचि बनाम अभिवृत्ति –

अभिरूचि –

  • यह भविष्य में उचित प्रशिक्षण प्रदान किए जाने पर व्यक्ति में कुछ कार्य करने हेतु विद्यमान जन्मजात क्षमता होती है।
  • यह पहले से विद्यमान नहीं है तो उसे विकसित नहीं किया जा सकता।

अभिवृत्ति –

  • यह वस्तुतः लोगों, विषय-वस्तुओं या समस्याओं का स्थायी व सामान्य मूल्यांकन होता है।
  • इसको कुछ अर्थों में परिवर्तित किया जा सकता है।

नोलन समिति द्वारा अनुशंसित सिविल सेवा मूल्य –

  • निःस्वार्थता
  • सत्यनिष्ठता
  • वस्तुनिष्ठता
  • जवाबदेही
  • खुलापन
  • ईमानदारी
  • नेतृत्व क्षमता

लोक सेवकों के द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन करते समय निम्न बातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए –

  • देशभक्ति तथा राष्ट्रीय हितों को बनाए रखना।
  • संविधान तथा राष्ट्रीय कानूनों के प्रति निष्ठा।
  • निष्पक्षता, भेदभाव रहित, ईमानदारी, कर्मठता, विनम्रता तथा पारदर्शिता।
  • पूर्ण सत्यनिष्ठा बनाए रखना।

सत्यनिष्ठा – सत्यनिष्ठ होने का अर्थ ईमानदारी तथा अपरिवर्तनशील दृढ़ नैतिक सिद्धांतों का गुण रखने वाला व्यक्ति होना है।

                सिविल सेवकों के सत्यनिष्ठ होने का अर्थ यह भी है कि उनका चरित्र ऐसा हो जिससे लोगों में सार्वजनिक पदों के प्रति विश्वास जगे।

सत्यनिष्ठा के प्रकार –

  • नैतिक सत्यनिष्ठा – इसका उपयोग कोई व्यक्ति दूसरों के साथ-साथ स्वयं के उचित या अनुचित होने का आकलन करने के लिए करना है।
  • पेशेवर सत्यनिष्ठा – पेशे की नैतिक संहिता, मानदंडो, मानको और मूल्यों का अनुपालन करने से है।
  • बौद्धिक सत्यनिष्ठा – बौद्धिक सत्यनिष्ठा को एक ऐसे व्यापक गुण के रूप में माना जा सकता है जो इन व्यक्तिगत गुणों को सक्षम बनाए उनके मध्य उचित संतुलन बनाए रखे और उन्हें बढ़ावा दे। बौद्धिक सदगुण, साहस, ईमानदारी, निष्पक्षता, संवादशीलता।
  • कलात्मक सत्यनिष्ठा – एक कलाकार द्वारा अपने कार्य के प्रति प्रदर्शित सत्यनिष्ठा है। कार्य की सम्पूर्णता, सटीकता, सावधानीपूर्वक निष्पादन आदि।

सत्यनिष्ठा को विकसित करने के उपाय –

  • मॉडल लर्निग के माध्यम से
  • पुरूस्कार और दंड नीति से
  • संवेदनशीलता प्रशिक्षण से
  • नैतिक संहिता और आचार संहिता से।

निष्पक्षता (वस्तुनिष्ठता):- सामान्य सा अर्थ है कि तथ्यों और साक्ष्यों के साथ जुड़े रहना अर्थात् कोई घटना सत्य के उतनी ही करीब होगी जितने उसके समर्थन में साक्ष्य होगें।

          इसको विकसित करने के उपाय है जो पारदर्शिता जैसे – निर्णयों व तर्को को सार्वजनिक करना एवं आरटीआई अधिनियम से इसमें वृद्धि हुई।

सूचना प्रबंधन प्रणाली – संगठन को घटनाओं, सूचनाओं और आंकड़ों का अभिलेखन करना चाहिए।

लोक सेवा के प्रति  समर्पण – सिविल सेवाओं में समर्पण व्यक्ति को सार्वजनिक कल्याण के विचार से एकीकृत कर देता है। सिविल सेवक के कत्र्तव्य की भावना उसके आधिकारिक उत्तरदायित्व के साथ एकीकृता को सुनिश्चित करता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उसका कत्र्तव्य उसका उद्धेश्य बन जाता है।

आवश्यकता क्यों ?

  1. संविधान में उल्लिखित आदर्शों जैसे न्याय, समानता आदि को प्राप्त करने के लिए।
  2. सिविल सेवकों को उनके कार्य में प्रभावी और लोगों के प्रति सहानुभूति पूर्ण बनाने के लिए।
  3. इसके बिना सिविल सेवकों के लिए जटिल परिस्थितियों में अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन करना कठिन होगा।

राजनीतिक तटस्थता – एक लोक सेवक अपने सार्वजनिक जीवन में राजनीतिक विचार या धारणाओं से पूर्ण मुक्त रहे। सिविल सेवकों द्वारा सरकार को बिना किसी राजनीतिक पूर्वोग्रहों के उचित सलाह देने चाहिए, साथ ही सरकार के निर्णय को कत्र्तव्य निष्ठता के साथ कार्यान्वित करना चाहिए।

एक अच्छे प्रशासक के गुण:-

  • एक अच्छा श्रोता।
  • कार्य सेवा के प्रति विशेष झुकाव।
  • उत्तरदायित्व ग्रहण करने की तत्परता।
  • स्वहित के लिए अपनी शक्ति और प्राधिकार के प्रयोग से परहेज रखना।
  • योग्य नेतृत्व प्रदान करने में सक्षम।
  • एक योग्य टीम वर्कर।

सहिष्णुता:- किसी व्यक्ति के द्वारा अन्य लोगों या समूहों के मूलवंश, लिंग, मत, धर्म और विचारधाराओं का सम्मान करना और दूसरों के अच्छे गुणों व कार्यों की प्रशंसा करते हुए अपने विचार प्रकट करना।

              जैन धर्म में सहिष्णुता को स्यादवाद के आदर्श के रूप में व्यक्त किया गया है जिसका अर्थ है सभी का दृष्टिकोण उनके परिप्रेक्ष्य से सही है, परन्तु कोई भी विशिष्ट दृष्टिकोण पूर्णतः सही नहीं है।

सहानूभूति (संवेदनशीलता) :- किसी व्यक्ति की परिस्थिति को उसके परिप्रेक्ष्य से समझना अर्थात् स्वयं को किसी अन्य व्यक्ति की स्थिति में रखकर उसके द्वारा सामना की जाने वाली परिस्थितियों की अनुभूति प्राप्त करना है।

विकसित करने के उपाय :-

  • संवेदनशीलता का प्रशिक्षण।
  • खुला संवाद।
  • सर्वधर्म समभाव।
  • कला और साहित्य।
  • अन्य संस्कृतियों के प्रति रूचि का संवर्धन करना।

भेदभाव रहित तथा गैर-तरफदारी :- निष्पक्षता (भेदभाव रहित) न्याय पर आधारित एक व्यापक अवधारणा है। अर्थात् किसी का भी पक्ष न लेना होता है। निर्णय लेते समय वस्तुनिष्ठ मानकों पर बल होना चाहिए न कि पूर्वोग्रहों लोक सेवकों के लिए निष्पक्षता निम्न दो विभिन्न स्तरों पर कार्य करता है –

  1. राजनीतिक निष्पक्षता – एक लोकसेवक को इस प्रकार कार्य करना होता है जो उसके लिए निर्धारित है तथा साथ ही उसे मंत्रियों के विश्वास को भी बनाए रखना चाहिए। लोक सेवक द्वारा राजनीतिक गतिविधि के सम्बंध में उसके लिए निर्धारित प्रतिबंधों का अनुपालन करना चाहिए।
  2. सार्वजनिक निष्पक्षता – एक लोक सेवक स्वयं के लिए निर्धारित उत्तरदायित्वों का निर्वहन निष्पक्ष, न्यायोचित, वस्तुनिष्ठ और न्यायसंगत रूप से करना चाहिए।

गैर तरफदारी – गैर तरफदारी से आशय है कि लोक अधिकारी को अपना कार्य किसी राजनीतिक दल के भय के बिना या पक्षपात रहित होकर करना चाहिए, भले ही उसका किसी राजनीतिक विचारधारा के प्रति दृढ़ विश्वास क्यों न हो।

भावनात्मक समझ – भावनात्मक बुद्धिमता स्वयं की भावनाओं को समझते हुए अपने समूह की भावनाओं को भी समझना, दूसरों के प्रति सहानुभूति को प्रकट करना तथा भावनाओं का विनियमन या नियंत्रण व संतुलन स्थापित करने की क्षमता है।

            भावनात्मक समझ स्वयं की एवं दूसरों की भावनाओं तथा संवेगों को समझने, व्यक्त करने और नियंत्रित करने की योग्यता है।

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स्वजागरूकता –

  • अपनी भावनाओं को अच्छी तरह समझना और उन्हें अपने नियंत्रण से बाहर ने होने देना।
  • आत्म जागरूक लोग, आत्म नियंत्रण के साथ-साथ आत्म विश्लेषण का गुण भी रखते है।

आत्म प्रबंधन –

  • अपनी भावनाओं और आवेगों को स्वतः नियंत्रित करने की क्षमता और गुण है।
  • कोई भी कार्य करने से पहले उसके बारे में विचार-विमर्श करते है।

आत्म प्ररेणा –

  • उच्च भावनात्मक समझ वाला व्यक्ति अपने आपको लगातार प्रोत्साहित करता है।
  • वह सफलता की आशा से संचालित होता है न कि असफलता रूपी भय से।

सामाजिक जागरूकता – दूसरों की भावनाओं, विचारों व स्थितियों को समझना तथा उसके प्रति संवेदनशील होना।

सम्बंध प्रबंधन – दूसरे लोगों की भावनाओं को निर्देशित करना।

भावनात्मक समझ की विशेषता:-

  • अपनी भावना, संवेगों को जानना और उसके प्रति संवेदनशील होना।
  • अपने संवेगों की प्रकृति के प्रभाव को जानना।
  • दूसरे व्यक्तियों की भावनाओं और संवेगों को जानना और उसके प्रति संवेदनशील होना।
  • दूसरों से व्यवहार करते समय अपने संवेगों पर नियंत्रण करना ताकि सामंजस्य की स्थिति प्राप्त हो सके।

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सिविल सेवा में भावनात्मक समझ की भूमिका –

  • भावनात्मक समझ से युक्त सिविल सेवक कमजोर, संवेदनशील वर्गो इत्यादि की भावनाओं को तत्काल समझ सकता है और उनके प्रति परानुभूति का व्यवहार प्रदर्शित करता है।
  • भावनात्मक समझ से युक्त सिविल सेवक सामाजिक बोध-कौशल के स्तर पर कार्य करता है।

नैतिक निर्णय निर्माण में भावनात्मक समझ की भूमिका –

  • अन्तर्रात्मा की आवाज या सदगुण से सम्बंधित भावनाओं पर विचार किया जाये।
  • किसी अधिकारी को निर्णय निर्माण के उपरांत यह ज्ञात हो कि उसने न्याय किया। सबके हितों को ध्यान में रखा तथा अधिक से अधिक लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्य किया है।

नेत्व्व के स्तर पर भावनात्मक समझ की भूमिका –

  • भावनात्मक समझ के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारियों को नेतृत्व करने की कला सिखायी जाती है।
  • एक प्रशासनिक अधिकारी से यह अपेक्षा की जानी है कि वह अपने अधीनस्थों को अभिप्रेरित रखे। इसके लिए आवश्यक है कि अधिकारी अधीनस्थों की इच्छाओं, भावनाओं को समझता हो।

प्रशासन और शासन में भावनात्मक समझ की भूमिका –

  • प्रशासनिक संगठनों के कर्मचारियों के बीच बेहतर अन्तः परस्पर सम्बंध की स्थापना।
  • अधिकारी, अधीनस्थ के मध्य ऊँच-नीच को समाप्त करना।
  • कर्मचारियोें के मध्य अत्यधिक सत्ता प्राप्ति की प्रतिस्पर्धा को संतुलित करना।
  • प्रशासन के सामूहिक निर्णय निर्माण के स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करे।

भावनात्मक क्षमता का संगठन में विकास –

  • सहयोगात्मक कार्य संस्कृति का होना।
  • लक्ष्य निर्धारण – ऐसा करते समय अपने अधीनस्थों की भागीदारी का साथ लिया जाना।
  • सामाजिक परिस्थिति से अवगत होना।
  • संगठनात्मक विवाद को फीडबैक के रूप में स्वीकार करना।

वर्तमान में सिविल सेवा में भावनात्मक समझ की प्रासंगिकता –सिविल सेवा के लिए अभिरूचि तथा बुनियादी मूल्य - ShivaGStudyPoint

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