नीति आयोग की रिपोर्ट NITI AAYOG REPORT

नीति आयोग की रिपोर्ट  ( NITI AAYOG REPORT )

“स्ट्रैटजी फाॅर न्यू इंडिया @ 75”

  खण्ड – वाहक  

  • प्रस्तावना
  • विकास
  • उद्योग
  • तकनीक एवं नवाचार
  • रोजगार एवं श्रम सुधार
  • वित्तीय समावेशन
  • सभी के लिये आवास
  • यात्रा, पर्यटन एवं आतिथ्य
  • खनिज
  • किसानों की आय दोगुना करना (I) कृषि का आधुनिकीकरण
  • किसानों की आय दोगुना करना (II) कृषि श्रृंखला और ग्रामीण अवसंरचना
  • किसानों की आय दोगुना करना (III) नीति एवं प्रशासन
  • मुख्य परीक्षा हेतु संभावित प्रश्न

प्रस्तावना :- वर्तमान समय चैथी औद्योगिक क्रांति का है। इस काल में विकास का मूल माध्यम तकनीक होगा। तकनीक यथा – बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट आॅफ थिंग्स, रोबोटिक्स, नैनो तकनीक, क्लाउड कंम्प्यूटिंग और बायोटेक्नोलाॅजी इत्यादि है।
                         “थर्ड वेब” नामक पुस्तक में एल्विन टोफलर इंगित करते है कि विकास की क्रांति या चरण की दर पिछली विकास दरों की तुलना में सौ गुना से भी अधिक होगी। भारत के प्रधानमंत्री जी ने इस बात को दोहराया भी था कि भारत औपनिवेशक संरचना में बंधा हुआ था, जिस कारण से पहले की औद्योगिक क्रांतियों का लाभ नहीं ले पाया था, लेकिन अब समय आ गया है कि भारत चैथी औद्योगिक क्रांति का नेतृत्वकत्र्ता की भूमिका का निर्वहन करेगा। इसी का ही परिणाम है कि हर कोई भारत में उपर्युक्त तकनीक क्षेत्रों में निवेश करने की ओर अग्रसर है। उदाहरण स्वरूप – विश्व आर्थिक मंच ने महाराष्ट्र राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स शोध एवं निर्माण से संबंधित केन्द्र की स्थापना की है

                      समग्र विकास के दृष्टिकोण को अपनाकर नया भारत के निर्माण का आह्वान किया है। इसके लिए जनसहयोग की आवश्यकता होने के साथ, अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधार पर बल देना होगा। अतः छोटे समय के लिए योजना बनाने की आवश्यकता है। इसी उद्धेश्य से नीति आयोग ने “स्ट्रैटजी फाॅर न्यू इंडिया @ 75” नामक एक रिपोर्ट जारी की है। जिसका उद्धेश्य 2022 तक भारत को एक ऐसे समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त करना है जिसमें अर्थव्यवस्था में परिवर्तन, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन को बनाना, संसाधनों तक पहुंच को सुगम एवं सरल बनाना है।

  • रिपोर्टं तीन प्रमुख रणनीतियों पर फोकस करती है:-
    • जन सहभागीदारी – विकास की प्रक्रिया में लोगों की सहाभागिता जरूरी है। जैसे भारत छोड़ो आंदोलन में थी।
    • सभी क्षेत्रकों में सभी प्रांतों एवं राज्यों के मध्य संतुलित विकास की रणनीति।
    • सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रकों के निष्पादन अंतराल को पाटना अर्थात् विभिन्न क्षेत्रों में निजी क्षेत्रकों को बढ़ावा देना।

वाहक

  • विकास – उद्धेश्य-
    • GDP दर को तीव्रता से बढ़ाना तथा 2018-23 तक 8% के लक्ष्य को प्राप्त करना।
    • निवेश दर को GDP के वर्तमान 29% से बढ़ाकर 2022-23 तक 36% करना।
    • वस्तु एवं सेवा आयात को 2017-18 के 478 बिलियन डाॅलर से बढ़ाकर 2022-23 तक 800 बिलियन डाॅलर तक ले जाना।
    • आर्थिक समीक्षा 2018-19 के अनुसार सरकार का लक्ष्य 2022 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन अमेरिकी डाॅलर की अर्थव्यवस्था बनाना।
  • वर्तमान स्थिति –
    • भारत के GDP में विनिर्माण का प्रतिशत अन्य निम्न तथा मध्यम आय के देशों की तुलना में कम है। जैसे – आसियान देश।
    • 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद से इस क्षेत्र में अब तक खास बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।
  • बाधाएँ –
    • भारतीय उद्योग जगत में वैश्विक प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता का न होना।
    • सरकार के द्वारा अनेक उद्योगो को अपने स्वामित्व रखा गया।
    • श्रमिकों की रोजगार क्षमता कम थी, साथ ही कौशल विकास का अभाव था।
    • प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद, विनिर्मित वस्तुएं इत्यादि में निर्यात क्ष़्ामता का विकसित न होना।
  • आगे की राह –
    • निजी एंव सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन देना।
    • वाणिज्य कर और आय कर दोनों को युक्ति संगत बनाना।
    • टैक्स जमा करने की व्यवस्था को और आसान बनाना।
    • ऐसे केन्द्रीय सार्वजनिक उद्यम क्षेत्र जिनकी प्रकृति रणनीतिक नहीं है, सरकार को बाहर निकल जाना चाहिए।
    • कनेक्टिविटी को उन्नत बनाना। जैसे – समर्पित मालभाड़ा गलियारा।
    • सार्वजनिक-निजी निवेश माॅडल द्वारा अवसंरचना के क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देना।
    • लक्षित मुद्रास्फीति को बनाये रखना। (+-4)
    • भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पद्र्धात्मकता को सुनिश्चित करने के लिए पावर टैरिफ संरचना को युक्तिसंगत बनाना।
    • विनिर्माण एवं अवसंरचना जैसे श्रम गहन क्षेत्र में बड़े स्तर पर रोजगार निर्माण के प्रयास करना।
    • श्रमिकों की क्षमता के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर बल देना।
    • श्रम और भूमि विनिमय को आसान बनाने के लिये राज्य के लिये राज्य के साथ समन्वय करना।
  • उद्योग – उद्धेश्य –

विनिर्माण क्षेत्र की वर्तमान विकास दर को 2022 तक दोगुना करना।

चैथी औद्योगिक की तकनीकों को विनिर्माण क्षेत्र में अपनाना।

 

NOTE :- सरकार विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित पहलें कर रही है जो है –

2020 तक GDP में विनिर्माण क्षेत्र के योगदान को 25% तक बढ़ाना।

मेक इन इंडिया एक्शन प्लान – नए उद्यमियों तक ऋण की पहुंच के लिए मुद्रा योजना, स्टैण्ड अप योजना।

नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप इंडिया।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का पुनर्पूंजीकरण करना ताकि MSME क्षेत्र में ऋण की आसानी से उपलब्धता हो सके।

बजट 2019-20 में ग्रामीण क्षेत्रों के परम्परागत उद्योगों को आर्थिक मूल्य श्रृंखला से जोड़ने के लिए “स्फुर्ति” योजना का शुभारम्भ।

नवाचार, ग्रामीण उद्योग और उद्यमिता क्षेत्र को विकसित कर गांवों को इन्क्यूबेटर की भूमिका निभाने हेतु बजट 2019-20 में “एस्पायर” योजना शुरू की गई।

 

 

आगे की राह –

ग्रामीण क्षेत्रों का कलस्टर आधारित विकास पर बल। जैसे- पूरा योना।

MSME सेक्टर को प्राथमिकता देना। जैसे- “59 मिनट पोर्टल”।

सिंगल विडों क्लीयरेंस प्रदान करना ताकि उद्यमियों एवं निवेशकों को जटिलता का सामना न करना पड़े।

ई-काॅमर्स को बढ़ाना। प्रमाणीकरण प्रक्रिया को तेज करना।

लोकल ब्रांड एवं वितरण चैनल का विकास करना। जैसे- खादी इंडिया, ब्रांड इंडिया।

सभी सार्वजनिक कार्यलयों में GeM पोर्टल से 25% उत्पाद MSME से खरीदना तथा इसमें भी 3% महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को खरीदना।

प्रोजेक्ट की मौनिटरिंग के लिये एक पोर्टल का निर्माण करना जो इससे संबंधित बाधा को इंगित कर रियल टाइम में उसका समाधान करना।

ऐसे MSME जो निर्माण में औद्योगिक क्रांति 4.0 से सम्बंधित उत्पादों का निर्माण कर रहे है उन्हें विशेष इंसेटिव प्रदान करना।

 

तकनीक एवं नवाचार 7

उद्धेश्य –

भारत को वैश्विक नवाचार सूचकांक में 2022-23 तक शीर्ष 50 देशों की सूची में लाना।

हमारे पांच महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शोध संस्थानों को विश्व के शीर्ष 100 संस्थानों की सूची में लाना।

 

वर्तमान स्थिति –

भारत शोध एवं विकास कार्य के लिये एक प्रमुख बाह्यप्रायण (आउटसोर्स) का गंतत्व बन गया है। जैसे – 18M, google, Microsoft, Intel, Lppin के 1000 से अधिक केन्द्र है।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में की गई प्रगति इस बात को दर्शाती है कि तकनीक और नवाचार में हम काफी आगे बढ़े है और अभी हमें एक लम्बी दूरी तय करनी है। जैसे- मंगलयान, चन्द्रयान, गगनयान, आदित्य L-1, SLV, PSLV, GSLV, क्रायोजेनिक इंजन का आविष्कार इत्यादि।

भारत हल्के लड़ाकू विमानों का विकास, मिसाइलें, मिशन शक्ति एवं एमीसैट जैसे विकास के सुरक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में की गई प्रगति को दर्शाता है।

भारत स्टार्टअप की संख्या के दृष्टिकोण में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा देश है।

नवाचार, उद्यमिता एंव स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए अटल नवाचार मिशन तथा अटल ंिटंकरिग लैब शुरू किया गया है।

वर्ष 2013 में वैज्ञानिक प्रकाशन में भारत का विश्व में 6 वाँ स्थान था।

WIPO के अनुसार भारत विश्व में 7 वाँ सबसे बड़ा पेटेंट फाइल करने वाला देश है।

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