1857 ई. का विद्रोह PART – 1

1857 ई. का विद्रोह ( THE REVOLT OF 1857 ) PART – 1

19 वीं शताब्दी के भारतीय इतिहास की सबसे प्रमुख घटना 1857 की क्रांति, विद्रोह विप्लव है। इसके दूरगामी परिणाम निकले। यह विप्लव कंपनी सरकार की नीतियों के विरूद्ध जनता के दिलों में संचित असंतोष एवं विदेशी सत्ता के प्रति घृणा का परिणाम था। अंग्रेजी साम्राज्यवादी विचारधारा से प्रभावित इतिहासकारों ने इस विद्रोह को ‘सामंती असंतोष की अभिव्यक्ति’ मात्र कहा है परंतु वास्तव में प्रशासनिक, आर्थिक, सामाजिक तथा धार्मिक क्षेत्रों में अंग्रेजों की नीतियों ने जो अस्त व्यस्तता एवं असंतोष की भावना ला दी। उनकी ही अभिव्यक्ति सामंत, सेना और जनता के माध्यम से 1857 ई. के विप्लव में हुई।

विद्रोह के कारण :-

1. राजनीतिक कारण :-

  1. 1757-1857 के मध्य कंपनी द्वारा छल प्रपंच द्वारा राज्य को ग्रहण करना तथा लगान भारी मात्रा में लगा देना।
  2. शासकों के आंतरिक व बाह्य मामलों पर नियंत्रण कर शासकों को कटपुतलामात्र बना देना।
  3. लॉर्ड वेलेस्ली की सहायक संधि के कारण भी शासक परेशान थे।
  4. डलहौजी की हड़पनीति, गोद निषेध नीति, पेंशन वेद नीति।

2. प्रशासनिक कारण :-

  1. गवर्नर जनरलों के सुधार कार्य ऊपर से ही लुभावने प्रतीत होते है, व्यावहारिक दृष्टि से वे अत्यंत अलोकप्रिय एवं कष्टप्रद थे।
  2. कंपनी शासन की न्याय व्यवस्था अत्यंत दोष पूर्ण थी यानि खर्चीला भेदभाव पूर्ण थी।
  3. कृषकों पर अत्यधिक कर का बोझ चाहे कोई भूरा जांच प्रणाली (स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी, महालवाड़ी) उद्धेश्य एक लगान बढ़ाना तथा ज्यादा से ज्यादा धन कमाना।
  4. प्रशासन मे रिश्वतखोरी भ्रष्टाचार की अधिकता।
  5. ऊँची नौकरियाँ अंग्रेजों के लिए ही सुरक्षित थी।   http://www.shivagstudypoint.com
  6. देशी रियासतों का अंग्रेजी राज्य में विलय से उच्चकुलीन वर्गीय, मध्यवर्गीय व्यक्तियों, कलाकरों, धार्मिक पेशेवाले, व्यक्तियों के समक्ष बेकारी एवं भुखमरी की समस्या खड़ी हो गयी।

3. आर्थिक कारण :-

  1. भारत आते ही अंग्रेजों ने यहाँ कुटीर उद्योगों को नष्ट करना एवं अपने माल को थोपना शुरू किया। यह मुक्त व्यापार की नीति का दुष्टपरिणाम है।
  2. भारतीय वाणिज्य व्यापार पर कंपनी का एकाधिकार स्थापित हो जाना।
  3. अंग्रेजों की आर्थिक नीतियों से सभी वर्ग प्रभावित जिससे असंतोष की नीति ने घर कर लिया जो 1857 के कारणों में से एक बना।

4. सामाजिक कारण :-

  1. अंग्रेज अधिकारी भारतीयों को तिरस्कारपूर्ण दृष्टिकोण से देखते थे। एवं उनसे अपमानजनक व्यवहार करते थे।    http://www.shivagstudypoint.com
  2. वे अंग्रेज जाति की उच्चता में विष्वास रखते थे एवं ‘कालों’ के प्रति घ्रणा से देखते थे। जनसाधारण की बात ही अलग राजाराम मोहनराय तक को इस अपमान का सामना करना पड़ा।
  3. अंग्रेजों ने भारतीय रिति रिवाजों पर आक्रमण किया। बाल विवाह जाति प्रथा, गोद लेने की प्रथा से भारतीय सषंकित हो उठे।
  4. अंग्रेज भारत की भाषा, संस्कृति एवं प्राचीन परंपराओं को तीन दृष्टि से देखते थे। वैसी परिस्थितियों में अंग्रेजों के सुधार महत्व खो बैठे और उन्हें भारतीयों के आक्रोष का सामना करना पड़ा।

5. धार्मिक कारण :-

  1. भारत में ईसाई मिषनरियों ने असंतोष को बढ़ाने में सहायता की क्योंकि पादरी वर्ग भारतीय धर्म की खुली आलोचना करते थे।
  2. ईसाई धर्म स्वीकारने वालों को सरकारी नौकरी दी जाती है यानि धर्म परिवर्तन पर उनका जोर रहा।
  3. बेंटिक ने एक कानून पारित करवाकर पैतृक संपति में भी हिस्सा दिलवा दिया।
  4. गोद लेने की प्रथा हिन्दू धर्म के अंतर्गत मान्य थी उसको डलहौजी ने प्रतिबंध लगाकर सबको रूष्ट किया।     http://www.shivagstudypoint.com
  5. मुल्ला, मौलवी, पंडित, साधू-संन्यासी जिनका राजकीय संरक्षण समाप्त हो चुका था। उन्होंने राष्ट्रवाद का प्रचार किया।
  6. भारतीय रेल, तार, डाक जैसी सुविधाजनक एवं आवष्यक सुविधाओं को भी शंका की दृष्टि से देखते थे।
  7. चर्बी वाले कारतूस ने उनकी रही-सही उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया तथा विद्रोह की ज्वाला भड़क गयी।

5. अंग्रेजों के प्रति अविष्वास की भावना :-

          पहले की आक्रमणकर्ता भारत में ही बस गये लेकिन अंग्रेजों की नीति अलग वापस स्वदेष लौटने की थी।

6. अंग्रेजों की अजेयता में विष्वास कम होना :-

         यानि अफगान युद्ध, क्रीमिया युद्ध में अंग्रेजों को पराजेयता का सामना करना पड़ा इससे भारतीयों में यह विष्वास जगा दिया कि साहस और शक्ति से अंग्रेजों को परास्त कर भारत को मुक्त किया जा सकता है।

7. सैनिक कारण :-

        इन असंतोषों के बावजूद सैनिकों को सहयोग नहीं मिलता तो संभवत क्रांति नहीं होती। भाग्यवष सैनिक वर्ग भी अंग्रेजों से असंतुष्ट था। http://www.shivagstudypoint.com

8. तात्कालिक कारण :-

         कंपनी सरकार ने पुरानी ब्राउन बैस बंपूक की जगह जनवरी ई. से नई एनफील्ड राइफल का प्रयोग आरंभ किया। इस राइफल को कारतूस भरी जाती उसे दाँत से काटना पड़ता था। अफवाह यह फैल गयी की कारतूस में गाय, सूअर का मांस लगा है। अतः सैनिकों के मन में यह बात घर कर गयी की सरकार उनका धर्म भ्रष्ट कर रही है। उस घटना ने उस आग को जलाया जिसके लिए लकड़ियाँ पहले ही इकठ्ठी हो रखी थी। लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया कि कंपनी औरंगजेब की भूमिका में है और सैनिकों को षिवाजी बनना है।  http://www.shivagstudypoint.com

शेष जानकारी के लिए पढ़े भाग – 2 में…> http://www.shivagstudypoint.com

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